पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु चयनित होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा गोरखपुरिया पूर्वांचली प्रोफेसर के दबाव के कारण उनकी फीस जमा करने हेतु पोर्टल नहीं खोले जाने के विरोध में शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ 24 दिसम्बर से देंगे अनिश्चितकालीन धरना

 प्रेस विज्ञप्ति

पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु चयनित होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा गोरखपुरिया पूर्वांचली प्रोफेसर के दबाव के कारण उनकी फीस जमा करने हेतु पोर्टल नहीं खोले जाने के विरोध में शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ 24 दिसम्बर से देंगे अनिश्चितकालीन धरना



झाँसी : झाँसी के जरबौगांव, बरूआसागर निवासी किसान हीरालाल कुशवाहा के पुत्र गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ का 05 दिसम्बर 2025 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परिणाम में पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु चयन हुआ है लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा गोरखपुरिया पूर्वांचली प्रोफेसर के दबाव के कारण उनकी फीस जमा करने हेतु अब तक पोर्टल नहीं खोला गया है। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 27 दिसम्बर है। समय से फीस जमा हो इसलिए पोर्टल खुलवाने हेतु और प्रवेश सुनिश्चित करने हेतु शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ ने 24 दिसम्बर से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। आपको बता दें कि गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से 7.70 सीजीपीए के साथ बी०ए० (ऑनर्स) हिन्दी की उपाधि अर्जित की है और वर्ष 2024 में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय से एम०ए० हिन्दी 8.23 सीजीपीए के साथ उत्तीर्ण करते हुए बुन्देलखण्ड महाविद्यालय, झाँसी (बीकेडी) में सर्वोच्च स्थान अर्जित किया है। इसके साथ ही उन्होंने एम०ए० हिन्दी में ‘21वीं सदी में बुन्देली : एक मूल्यांकन’ नामक विषय पर लघुशोध किया था, जिसकी परीक्षकों और विद्वानों द्वारा प्रसंशा की गई। इसके साथ ही तीन बार हिन्दी विषय से यूजीसी - नेट उत्तीर्ण किया है। कुशराज बुन्देली-हिन्दी के युवा लेखक होने के साथ ही बुंदेली-बुंदेलखंड अधिकार कार्यकर्त्ता हैं। इनकी चार पुस्तकें क्रमशः ‘पंचायत’, ‘घर से फरार जिंदगियाँ’, ‘डॉ० विनयकुमार पाठक और इक्कीसवीं सदी के विमर्श’, ‘आखिर कब तक’, तीन पुस्तक अध्याय, सात शोधपत्र और पाँच दर्जन से अधिक लेख प्रकाशित हैं। इन्होंने सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव पोर्टल हेतु ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अखण्ड बुन्देलखण्ड का योगदान’ विषय पर 23 कहानियाँ लिखी हैं। 


विगत 26 नवम्बर 2025 को वीसी कमेटी हॉल, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश हेतु साक्षात्कार था। साक्षात्कार के दिन जब कुशराज हिन्दी विभाग के बाहर खड़े थे, तब प्रो० मुन्ना तिवारी जी आए और कहने लगे - “देखते हैं कि कैसे पाते हो तुम पीएचडी में प्रवेश। तुम्हारा विश्वविद्यालय आना बंद करा देंगे। तुम हमें नहीं जानते अभी…।” 


वर्ष 2023 में प्रो० मुन्ना तिवारी के संयोजन में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी के हिन्दी विभाग, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ एवं प्रज्ञा : द क्रिएटिव एण्ड लिटरेरी क्लब द्वारा दिनाँक 14-21 सितंबर 2023 में आयोजित हिन्दी निबंध और हिन्दी कहानी लेखन प्रतियोगिता में कुशराज ने प्रतिभाग किया था। जिसमें उन्होंने ‘भारत की भाषा समस्या और हिन्दी’ नामक निबंध और ‘हिन्दी : भारत के माथे की बिंदी’ नामक कहानी लिखी थी। इस निबंध और कहानी प्रतियोगिता में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, लेकिन भेदभाव के चलते उन्हें पुरस्कार की धनराशि और प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया था, तब उन्होंने माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया और माननीय कुलपति महोदय को अपने निबंध और कहानी की मूल प्रति की प्राप्ति और लेखकीय अधिकारों के संरक्षण हेतु पत्र लिखा था।  माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया के आदेश पर कुशराज को प्रो० मुन्ना तिवारी से निबंध और कहानी की मूल प्रति प्राप्त हुई थी। उक्त प्रतियोगिता के प्रकरण से प्रो० मुन्ना तिवारी कुशराज के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं और उनका अहित करने की कूटनीति चला रहे हैं।


प्रो० मुन्ना तिवारी द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार और अभद्रता से कुशराज बहुत भयभीत थे। कुशराज को आशंका थी कि प्रो० मुन्ना तिवारी उनका पीएचडी प्रवेश न रुकवा दें। इसलिए उन्होंने 04 दिसम्बर 2025 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० मुकेश पाण्डेय को शिकायती पत्र दिया था। उन्होंने इस पत्र में कुलपति महोदय से यह की थी कि अकादमिक योग्यता के आधार पर उनका पीएचडी में प्रवेश हो, उनके साथ कोई भेदभाव न किया जावे। कुशराज बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की उन्नति हेतु सदा सक्रिय रहते हैं। उन्होंने बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की युगान्तकारी अकादमिक उन्नति पर केंद्रित लेख ‘बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय का स्वर्णयुग है कुलपति प्रो० मुकेश पाण्डेय का कार्यकाल’ लिखा है, जो 10 नवम्बर 2025 को सन्दौली टाइम्स, बाराबंकी / लखनऊ में प्रकाशित हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने बुन्देली विरासत दीर्घा के निर्माण में रचनात्मक सहयोग किया है और बुन्देली विरासत दीर्घा पर केंद्रित लेख ‘बुन्देलखण्डी ज्ञान परंपरा की अनोखी प्रयोगशाला है बुन्देली विरासत दीर्घा’ 29 नवम्बर 2025 को वीरांगना झाँसी न्यूज, झाँसी में प्रकाशित हुआ है।


- गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’

(बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश हेतु संघर्षरत बुंदेलखंडी युवा)

मो. : 9569911051, 8800171019

ईमेल : kushraazjhansi@gmail.com

23 दिसम्बर 2025, झाँसी



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