किसान साहित्य के प्रणेता हैं महात्मा जोतिबा फुले - कुशराज
किसान साहित्य के प्रणेता हैं महात्मा जोतिबा फुले सामाजिक-सांस्कृतिक क्रांति के अग्रदूत, किसान साहित्य के प्रणेता, किसानवादी दार्शनिक, राष्ट्रपिता महात्मा जोतिबा फुले जी की 11 अप्रैल को 200वीं जयंती मनाई जा रही है। आज की युवा पीढ़ी को ज्योतिबा फुले जी के विचारों से जोड़ते हुए समावेशी समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने हेतु 200वीं महात्मा फुले जयंती के उपलक्ष्य में भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय दो वर्ष (2026 से 2028 तक) चलने वाले राष्ट्रव्यापी समारोह का शुभारंभ कर रहा है। किसान जातियों की स्थिति और जातीय चेतना को ध्यान में रखते हुए भाजपा सरकार द्वारा जाति-जनगणना (घोषणा!) और यूजीसी समता कानून-2026 के बाद महात्मा फुले पर केंद्रित दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी समारोह आयोजित कराने का फैसला। इस सबसे किसान जातियों का वोट हासिल करने के उद्देश्य से ले रही है। लेकिन किसान जातियों को आगामी चुनावों में उन पार्टियों को वोट करना चाहिए जिनकी विचारधारा और चुनावी घोषणा-पत्र किसान जातियों के विकास पर केंद्रित हो। किसानवादी विचारधारा पर चलने वाली पार्टियाँ ही सत्ता में आकर किसान जातियों के साथ न्या...







