बुंदेली कहानी : महिन्द कक्का - कुशराज
बुंदेली कहानी “ महिन्द कक्का ” पोस्टर साभार : चैट जीपीटी © कुशराज ( किसानवादी आलोचक / शोधार्थी - हिन्दी विभाग बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय , झाँसी ) पता - 212, नन्नाघर , जरबौगांव , बरूआसागर , झाँसी , अखण्ड बुन्देलखण्ड - 284201 मो. - 9569911051, 8800171019 ईमेल - kushraazjhansi@gmail.com ब्लॉग - कुसराज की आबाज ***** अरे ! राम - राम ...................... भौतई दुखभरी खबर है। आज भुनसारें साढ़े चार बजें कछियाने के किसान महेंद सिंघ कुसबाहा नईं रए। पूरौ बलदेवपुरा गाँव इनें ‘ महिन्द कक्का ’ कैऊत तो। छप्पन साल की उमर में सरग सिधारे हैं महिन्द कक्का। गौऊंवन बरन , गूदगुदारे चैरे की छै फुट की नौंनी कदकाठी पे लामौं कुरता - पजामा , सदरी , किसानी मुड़ाछौ उर कुरता की ऊपरी खलेती में खुरसो पेन उर बई खलेती में रक्खी डायरी भौत जँचत ती बिन पे। कभऊँ - कभार सदरी के संगे सफेद धोती उर ...