दिल्ली के हंसराज कॉलेज का राष्ट्रीय युवा समागम और नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज'
बुंदेलखंडी युवा की डायरी
16 फरवरी 2026, झाँसी, अखंड बुंदेलखंड
दिल्ली के हंसराज कॉलेज का राष्ट्रीय युवा समागम और नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026
प्यारी क्रांति,
राम-राम! भौत दिनों बाद मिल रहे अपन। तुम्हें तो पता ही है कि हम बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी में अपने पीएचडी प्रवेश को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और पढ़ाई की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम अपनी शिक्षा के लिए संषर्घ की कहानी लिख रहे हैं। अगली साल यानी जनवरी 2027 तक हमारी पहली आत्मकथा ‘पढ़ाई की लड़ाई’ आप सबके बीच होगी। 11 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक हमारा दिल्ली में रहना हुआ। इन पाँच में हमने मुख्य रूप से 12-13 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच - विज्ञान भवन, नई दिल्ली में हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत का संकल्प और युवा’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा समागम में प्रतिभाग किया। हंसराज कॉलेज के माननीया प्राचार्या और पूजनीया गुरूमाता प्रो० (डॉ०) रमा जी ने इस ऐतिहासिक समागम में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और युवा-युवतियों को सम्बोधित करते हुए कहा - “विज्ञान भवन में हंसराज कॉलेज का यह तीसरा भव्य आयोजन है, जो इस संस्थान की अकादमिक विश्वसनीयता, बौद्धिक परंपरा और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ उपस्थिति को सशक्त रूप से रेखांकित करता है। हंसराज कॉलेज के युवा छात्र- छात्राएँ विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। चाहे वह शिक्षा क्षेत्र हो, राजनीति हो या फिर उद्योग जगत।” समागम के उद्घाटन समारोह में हंसराज कॉलेज के पुरातन छात्र माननीय किरन रिजिजू जी, केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, भारत सरकार मुख्य अतिथि रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के माननीय कुलपति प्रो० योगेश सिंह जी ने अध्यक्षता की। मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयुक्त आदरणीय मनोज श्रीवास्तव जी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। समापन समारोह में दिल्ली की माननीया मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी मुख्य अतिथि रहीं। भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी ने अध्यक्षता की।आध्यात्मिक चिंतक प्रदीप भैया जी महाराज विशिष्ट अतिथि और केंद्रीय राज्यमंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय) माननीय डॉ० जितेन्द्र सिंह जी मुख्य वक्ता रहे। राष्ट्रीय युवा समागम माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुरूप विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि तक पहुँचाने के लिए युवाओं से संवाद करने और उनको प्रेरित में सफल रहा। समागम ने हमारे भीतर एक नई राजनीतिक चेतना जागृत की। समागम में विशेषकर गुरुजनों प्रो० रमा मैम, डॉ० राजेश कुमार शर्मा सर, डॉ० नीतू शर्मा मैम, डॉ० राजमोहिनी सागर मैम, डॉ० वंदना सिंह मैम, डॉ० नृत्यगोपाल शर्मा सर, डॉ० विजय कुमार मिश्रा सर, डॉ० महेन्द्र प्रजापति सर, डॉ० प्रभांशु ओझा सर, डॉ० मनीष शर्मा सर और शिष्या बहिन आरती कुशवाहा, सहपाठी मित्र प्रेमराज कौशिक, जूनियर सूर्यप्रताप प्रजापति ‘सूर्या’, जूनियर अस्मिता द्विवेदी, जूनियर आयुष गुप्ता, जूनियर शिवम सिंह, जूनियर कुमार मंगलम के साथ ही फोटोग्राफर पवन सैनी भैया से भेंट हुई। प्रियजनों से बहुत दिनों बाद मिलकर बड़ी खुशी हुई। समागम संयोजिका प्रो० रमा मैम और सहसंयोजक डॉ० विजय कुमार मिश्रा सर को भी बहुत खुशी हुई कि हम झाँसी से समागम में प्रतिभाग करने पधारे। प्रो० रमा मैम से मिलकर हमें सफल नेतृत्व कराने वाली नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली।
13 जनवरी को हम बहिन आरती कुशवाहा के कॉलेज - दौलतराम कॉलेज गए। आरती ने अपनी शोध निर्देशका, अध्यक्ष हिन्दी विभाग डॉ० कुसुमलता मैम से मिलवाया। मैम ने आरती के शोध विषय “स्वामी प्रसाद श्रीवास्तव के बुंदेली नाटकों में सामाजिक चेतना और जनजागरण के स्वर’ पर चर्चा करने के बाद हमारे लेखन और शोध की चर्चा की। 15 जनवरी को हम बहिन आरती कुशवाहा, सूर्यप्रताप प्रजापति के साथ हंसराज कॉलेज गए। कॉलेज में प्रवेश करते ही स्नातक (बी०ए० हिन्दी ऑनर्स - 2017-20) की पढ़ाई के दौर की यादें ताजा हो गईं। हंसराज कॉलेज हॉस्टल गेट की महिला सुरक्षा गार्ड ‘आंटी’ से नमस्ते हुई तब वो बोलीं - “झाँसी में ही रहते हो, सही रहा अपने देश चले गए हो।” सच में, अपनी माटी - अपना जन्मभूमि से प्रेम और भक्ति के बढ़कर को भक्ति - देशभक्ति नहीं है और न ही अपनी माटी की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। हंसराज कॉलेज और प्रो० रमा मैम ने ही हमें राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कराया। जब हम 2017-2020 में हंसराज कॉलेज से स्नातक / बी०ए० हिन्दी ऑनर्स की पढ़ाई कर रहे थे। तब हमें अपने हिन्दी विभाग, हंसविजन, इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेल, निष्ठा - द हंसराज सिविल सर्विसेज सोसायटी समेत विभिन्न समितियों में कार्य करके अपना व्यक्तित्व विकास और कौशल विकास करने का सौभाग्य मिला। उस दौरान हमें विभिन्न मुद्दों जैसे - ‘हंसराज कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना’, ‘कॉलेज की समस्त सूचनाएँ / आदेश / नोटिस हिन्दी में भी निकलें’, ‘ई०सी०ए० और स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स की कार्यस्थल की अटेंडेंस को भी क्लास अटेंडेस माना जाए और उनको भी अटेंडेस के पूरे मार्क्स मिलें’ इत्यादि पर कार्य करने के साथ ही इन मुद्दों को लेकर हंसराज कॉलेज छात्र संघ में सचिव पद पर चुनाव लड़ने का सौभाग्य मिला। इस दौरान हमने अपने लेखक रूप को निखारा और ‘किसान विमर्श’ और ‘नरवाद यानी पुरुष विमर्श’ के सिद्धांत प्रतिपादित किए। मेरे राजनैतिक गुरू भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी हैं इसलिए ‘मोदी सेना - कुशराजवादी’ संगठन बनाया है और मोदी जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया है। 15 जनवरी को हंसराज कॉलेज में लोकतंत्र की दीवार, हंसराज कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल, महात्मा दयानंद सरस्वती और महात्मा हंसराज की कॉलेज परिसर में स्थापित प्रतिमा देखकर अपने सपने साकार होते दिखे। समागम का प्रतिभागी प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद गुरुजनों से भेंट की। फिर कैंटीन गए, जॉन अंकल से मिलकर बहुत अच्छा लगा। एलपी पर सहपाठी मित्र यूट्यूबर देवेंद्र राठ और कवि प्रेमराज कौशिक से भेंट हुई। हंसराज कॉलेज का भौत-भौत धन्यवाद हमें अपार विद्या, नेतृत्व क्षमता, लेखन योग्यता, वैचारिक शक्ति इत्यादि देने के लिए।
11, 14 और 15 जनवरी 2026 को हम नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला गए। 11 जनवरी 2026 को पुस्तक मेला में हम वैचारिक साथी, प्रोफेसर की डायरी के लेखक, प्रोफेसर ‘डॉ० लक्ष्मण यादव’ जी की किताब ‘जाति जनगणना’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। जब हमने लक्ष्मण सर से ‘जाति जनगणना’ पर ऑटोग्राफ लिए तब उन्होंने हमारे पीएचडी एडमिशन और बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रह के बारे में चर्चा की। लक्ष्मण सर की दोनों किताबें ‘प्रोफेसर की डायरी’ और ‘जाति जनगणना’ किसान जातियों के उत्थान में युगान्तकारी कदम साबित हो रही हैं। इस दौरान भाई सौरभ कुशवाहा और जूनियर कवींद्र अंबेडकर हमारे साथ रहे। हमने ये किताबें - ‘भारतीय भाषा कोश’, ‘भारतीय भाषा परिचय’, ‘वार्षिकी 2023’ और ‘वार्षिकी 2024’ केंद्रीय हिन्दी निदेशालय के स्टॉल से खरीदीं। भावना प्रकाशन, नई दिल्ली के स्टॉल पर हमारी किताब ‘डॉ० विनय कुमार पाठक और इक्कीसवीं सदी के विमर्श’ लगी हुई थी। प्रकाशक नीरज मित्तल जी से किताबों पर सार्थक चर्चा हुई। वहीं स्वतंत्र प्रकाशन, नई दिल्ली के स्टॉल पर हमारे द्वारा संपादित किताब ‘आखिर कब तक - डॉ० रामशंकर भारती’ लगी हुई थी। प्रकाशक सुशील स्वतंत्र जी से बुंदेली और बुंदेलखंड पर केंद्रित किताबों के लेखन और प्रकाशन लेकर सार्थक चर्चा हुई। हमने राजकमल प्रकाशन की पुस्तक मित्र योजना की सदस्यता ली।
14-15 जनवरी 2026 को पुस्तक मेले में बहिन आरती कुशवाहा, भाईसाब गोविंद कुशवाहा, भाई सूर्यप्रताप प्रजापति ‘सूर्या’ हमारे साथ रहे। पुस्तक मेले में विश्वप्रसिद्ध प्रोफेसर और लेखक डॉ० लक्ष्मण यादव, विश्वप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्त्ता कैलाश सत्यार्थी जी, विश्वप्रसिद्ध लेखक और लोकसंस्कृतिकर्मी सुभाष चन्द्र कुशवाहा, रामपुर निवासी कॉलेज सीनियर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ० मोहम्मद जावेद भैया, दमोह - बुंदेलखंड निवासी प्रशांत जैन भैया, सहपाठी मित्राणी शोधार्थी प्रेरणा मिश्रा, आगरा निवासी मित्र रवि कुशवाह, हिंदुस्थान समाचार एजेंसी की पत्रकार माधवीमणि त्रिपाठी और मैहर निवासी राजकमल प्रकाशन समूह की फोटोग्राफर आयुषी सेन के साथ ही हंसराज कॉलेज के नए जूनियर्स से भेंट हुई।
पुस्तक मेला परिसर भारत मंडपम - प्रगति मैदान में शिष्या आरती कुशवाहा ने हमें शॉल और किताब ‘रेत की मछली - कांता भारती’ भेंटकरके सम्मानित किया। हमने आरती को ‘बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति और साहित्य - अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद’ भेंट की और उसे महान लेखिका बनने का आशीर्वाद दिया।
इस बार के पुस्तक मेले से हमने ये किताबें और पत्रिकाएँ खरीदीं - चाचाजी शिवजी श्रीवास्तव की क्रांतिकारी डॉ० भगवानदास माहौर, जाति जनगणना - डॉ० लक्ष्मण यादव, विश्वगुरु - नीलोत्पल मृणाल, जाति : बदलते परिप्रेक्ष्य - सुरिंदर सिंह जोधका, नौकर की कमीज - विनोद कुमार शुक्ल, सिनेमा का इतिहास - प्रो० रमा, सामाजिक क्रांति की वाहक सावित्रीबाई फुले - सुशीला कुमारी, ज्योति कलश - संजीव, अटल बिहारी वाजपेयी - विजय त्रिवेदी, राममनोहर लोहिया - इंदुमति केलकर, किसान क्या करें - स्वामी सहजानंद सरस्वती, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों द्वारा कृषक महिलाओं का सशक्तिकरण - वीरेंद्र कुमार भारती, भारतीय खेतिहरों की स्थिति - जी० एस० भल्ला, भारतीय महिला किसान - मैत्रेयी कृष्णराज एवं अरुणा कांची, सहरिया आदिवासी : जीवन और संस्कृति - प्रमोद भार्गव, दलित वीरांगनाएँ एवं मुक्ति की राह - बद्री नारायण, स्त्रियाँ पर्दे से प्रजातंत्र तक - दुष्यन्त, अठारहवीं लोकसभा के सदस्यों का संक्षिप्त परिचय, टेंशन मत ले यार - दिव्य प्रकाश दुबे समकालीन भारतीय साहित्य सितंबर-अक्टूबर 2021, देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी का मानकीकरण, योजना : कला संस्कृति एवं विरासत, योजना : भारतीय सिनेमा, योजना : गणतंत्र, योजना : डिजिटल युग में कला और संस्कृति, योजना : वर्ष भर का पुनरावलोकन, योजना : स्वच्छ भारत मिशन के 10 वर्ष, कुरुक्षेत्र : सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण, कुरुक्षेत्र : ग्रामीण भारत के लिए बजट 2024-25, मन की बात : भारत का खेल गौरव परचम फहराती महिलाएँ, करुणा की चिंगारी : नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के जीवन की प्रेरक कहानियाँ, भारत 2025, रंग प्रसंग 2010, आलोचना 53, आलोचना 54, आलोचना 60 नामवर सिंह, साहित्य अमृत अटल स्मृति अंक दिसंबर 2018, कथादेश : मोहन राकेश - सृजन और संवेदना इत्यादि।
इस बार दिल्ली में फुफेरे भाई ‘सौरभ कुशवाहा’, कॉलेज सीनियर ‘दीदी पूर्णिमा पाण्डेय’, सहपाठी मित्र ‘मोहम्मद आतिफ’, सहपाठी मित्र ‘आशुतोष चौबे’, सहपाठी मित्राणी ‘निशि यादव’, सहपाठी मित्राणी ‘पायल दहिया’, जूनियर ‘कोमल चौरसिया’ मित्र ‘सुयश’, गाजीपुर निवासी दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत के शोधार्थी ‘प्रदीप कुशवाहा’ से भेंट हुई।
पुस्तक मेला किताबों का मेला था। किताबें ही हमें साहसी और सशक्त बनाती हैं। किताबें ही अच्छी और सच्ची दोस्त होतीं हैं। दोस्त भी किताबों जैसे ही होते / होती हैं। दोस्त ने किताबों से ज्यादा हमें सिखाया। समाज के नजरिए से हमें किसी को नहीं देखना चाहिए क्योंकि समाज रोटी नहीं देगा, हमें अपनी रोटी स्वयं कमानी होगी, स्वयं बनानी होगी और स्वयं ही खानी होगी इसलिए सबको अपनी रोटी कमाने हेतु काम करते रहना चाहिए।
© किसान गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’
(युवा लेखक, किसानवादी विचारक, इतिहासकार, बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रही, बुंदेली-बुंदेलखंड अधिकार कार्यकर्त्ता)
16 फरवरी 2026, 11:35 रात
झाँसी, अखंड बुंदेलखंड



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