बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी के शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ ने अपने पीएचडी एडमिशन मामले में माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया को लिखा पत्र
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** प्रेस विज्ञप्ति **
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी के शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ ने अपने पीएचडी एडमिशन मामले में माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया को लिखा पत्र
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झाँसी : 05 दिसम्बर 2025 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी में पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु चयनित शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज' ने अब तक अपनी फीस जमा न होने पर बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की माननीया कुलाधिपति और राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में अपना पीएचडी प्रवेश सुनिश्चित कराने के संबंध में पत्र लिखा। जिसकी प्रतिलिपि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो० मुकेश पाण्डेय को सौंपी। गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ ने विश्वविद्यालय द्वारा गोरखपुरिया पूर्वांचली प्रोफेसर के दबाव के कारण फीस जमा करने हेतु अब तक पोर्टल नहीं खोले जाने पर 24 दिसंबर 2025 से 27 दिसंबर 2025 तक बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की अनुमति से मोदी सेना के बैनर तले विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर व्यक्तिगत सत्याग्रह किया था। उनके सत्याग्रह का नाम है - बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रह / पढ़ाई की लड़ाई। कुशराज ने पत्र में राज्यपाल महोदया से यह निवेदन करते हुए लिखा है कि निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार किया जाए -
(1) बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में मेरा पीएचडी प्रवेश सुनिश्चित हो।
(2) मेरा पीएचडी प्रवेश शुल्क छात्र कल्याण कोष / पीएम ऊषा (मेरू) कोष से जमा होना सुनिश्चित हो।
(3) मेरे पीएचडी प्रवेश में बाधा डालने वाले और षड्यंत्र रचने वाले प्रोफेसरों और अधिकारियों पर तत्काल उच्च स्तरीय जाँच कमेटी गठित की जाए और उनको उचित दण्ड देते हुए कार्यवाही करके मेरे साथ न्याय किया जाए।
(4) पीएचडी प्रवेश में रुकावट के कारण मेरी मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक क्षति की विश्वविद्यालय द्वारा क्षतिपूर्ति की जाए।
(5) जाँच समिति गठित कराने वाले व्यक्ति का विवरण हमें प्राप्त हो।
(6) जाँच समिति, सिर्फ मेरे प्रवेश पर ही क्यों गठित की गई है, इसका स्पष्टीकरण मुझे प्राप्त हो।
(7) मेरे पीएचडी प्रवेश मामले की फाइल के समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति मुझे सौंपी जाए।
(8) जाँच समिति ने अब तक क्या कार्यवाही की, कार्यवाही की प्रति मुझे सौंपी जाए।
(9) मेरे प्रवेश हेतु हुए साक्षात्कार के पैनल / विषय विशेषज्ञ का विवरण मुझे प्राप्त हो।
(10) मेरे प्रवेश हेतु साक्षात्कार के बाद पैनल द्वारा की गई टिप्पणी की छायाप्रति मुझे प्राप्त हो।
(11) मेरी मेरिट जारी की जाए और मुझे साक्षात्कार में 30 में से कितने अंक मिले, ये जानकारी मुझे प्रदान की जाए।
(12) मेरे प्रवेश हेतु साक्षात्कार की सीसीटीवी वीडियो रिकॉर्डिंग मुझे प्राप्त हो।
महोदया, मेरा पीएचडी प्रवेश 05 दिसम्बर 2025 से ही माना जाए ताकि मैं 36 महीने में अपना शोध कार्य पूरा करके पीएचडी उपाधि अर्जित कर सकूँ और अकादमिक जगत में अपना कैरियर बना सकूँ। एक निवेदन और है कि आप मेरी अकादमिक योग्यता और उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए मेरे लिए रोजगार की व्यवस्था करने पर भी विचार करें। जब पीएचडी प्रवेश में ही मुझे इतना परेशान होना पड़ रहा है तो स्थायी रोजगार हेतु कितना परेशान होना पड़ेगा। मैं भी राज्य की सेवा करना चाहता हूँ। अतः मुझे सेवा का एक अवसर प्रदान करने की कृपा करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मुझे आपके दरबार से न्याय मिलेगा। मैं आपका सदा आभारी रहूँगा।
शोधार्थी गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ द्वारा माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया को लिखा गया पत्र -
सेवा में,
माननीया कुलाधिपति / राज्यपाल महोदया
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी, उत्तर प्रदेश
विषय : 05 दिसम्बर 2025 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में मेरा पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु चयन होने के बाद अब तक मेरी फीस जमा नहीं कराई गई इसलिए विश्वविद्यालय में मेरा प्रवेश सुनिश्चित कराने के संबंध में।
महोदया,
सविनय निवेदन इस प्रकार है कि मैं गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’ पुत्र हीरालाल कुशवाहा, कुशवाहा जाति, किसान / पिछड़ा वर्ग से हूँ और ग्राम जरबौ, बरूआसागर, झाँसी, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में सामान्य वर्ग / अनारक्षित श्रेणी से पीएचडी अभ्यर्थी हूँ। 05 दिसम्बर 2025 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परिणाम में पीएचडी हिन्दी में प्रवेश हेतु मेरा चयन हुआ है। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा 05 दिसंबर 2025 को जारी पत्रांक - बु०वि०/शोध सेल/2025/3768 के अंतर्गत पीएचडी कोर्सवर्क हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची में पेज 8 पर मेरा विवरण इस प्रकार दिया गया है - 191, GIRJA SHANKAR KUSHVAHA, HIRALAL KUSHVAHA, GEN, HINDI, Selected for PhD Coursework in UR Category.
जबकि 05 दिसंबर 2025 को जारी ही पत्रांक - बु०वि०/शोध सेल/2025/3769 के अंतर्गत शुद्धि पत्र प्रकाशित किया गया, जो इस प्रकार है -
विश्वविद्यालय पत्रांक बु०वि०/ शोध सेल/2025/3768 दिनांक 05/12/2025 द्वारा पी-एच०डी० कोर्सवर्क हेतु दिनांक 08/10/2025 से दिनांक 01/12/2025 तक आयोजित हुये विभिन्न विषयों के साक्षात्कार के उपरान्त चयनित अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों की सूची में शिक्षाशास्त्र विषय में क्रमांक 87 पर चयनित छात्र अमित कुमार के पिता का नाम श्री बृज लाल के स्थान पर श्री कामता प्रसाद गौतम पढ़ा जाये।
उक्त पत्र उर्पयुक्त स्थिति तक ही संशोधित समझा जाय।
(ज्ञानेन्द्र कुमार)
कुलसचिव
महोदया, जब उक्त पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि -
“चयनित अभ्यर्थियों की सूची में शिक्षाशास्त्र विषय में क्रमांक 87 पर चयनित छात्र अमित कुमार के पिता का नाम श्री बृज लाल के स्थान पर श्री कामता प्रसाद गौतम पढ़ा जाये और उक्त पत्र उर्पयुक्त स्थिति तक ही संशोधित समझा जाय।”
तब इस शुद्धि पत्र के अंतर्गत प्रकाशित पीएचडी कोर्सवर्क हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची में संशोधित पेज 8 पर मेरा विवरण इस प्रकार दर्ज कर दिया जाना अनुचित है - 191, GIRJA SHANKAR KUSHVAHA**, HIRALAL KUSHVAHA, GEN, HINDI, Provisionally Selected for PhD Coursework in UR Category.
कुल 406 चयनित अभ्यर्थियों में से सिर्फ मेरा चयन प्रोविजनल कर दिया जाना और डबल स्टार (**) के साथ ये टिप्पणी लिख दिया जाना शुद्धि पत्र के मुताबिक अन्यायपूर्ण, दोषपूर्ण और असंगत है -
**S.No. 191, GIRJA SHANKAR KUSHVAHA (Subject : Hindi), fees shall be deposited after the decision and approval of inquiry committee as recommended by Ph.D Counselling Committee.
महोदया, अतः मेरा आपसे प्रथम निवेदन यह है कि मेरे पीएचडी प्रवेश में बाधा डालने वाले और षड्यंत्र रचने वाले प्रोफेसरों और अधिकारियों पर तत्काल उच्च स्तरीय जाँच कमेटी गठित की जाए और उनको उचित दण्ड देते हुए कार्यवाही करके मेरे साथ न्याय किया जाए।
महोदया, मैं आपको यह भी अवगत कराना चाहता हूँ कि मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से 7.70 सीजीपीए के साथ बी०ए० (ऑनर्स) हिन्दी की उपाधि अर्जित की है और वर्ष 2024 में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय से एम०ए० हिन्दी 8.23 सीजीपीए के साथ उत्तीर्ण करते हुए बुन्देलखण्ड महाविद्यालय, झाँसी (बीकेडी) में सर्वोच्च स्थान अर्जित किया है। इसके साथ ही मैंने एम०ए० हिन्दी में ‘21वीं सदी में बुन्देली : एक मूल्यांकन’ नामक विषय पर लघुशोध किया है, जिसकी परीक्षकों और विद्वानों द्वारा प्रसंशा की गई। इसके साथ ही तीन बार हिन्दी विषय से यूजीसी - नेट उत्तीर्ण किया है। मैं बुन्देली-हिन्दी का युवा लेखक होने के साथ ही बुंदेली-बुंदेलखंड अधिकार कार्यकर्त्ता हूँ। मेरी चार पुस्तकें क्रमशः ‘पंचायत’, ‘घर से फरार जिंदगियाँ’, ‘डॉ० विनयकुमार पाठक और इक्कीसवीं सदी के विमर्श’, ‘आखिर कब तक’, तीन पुस्तक अध्याय, सात शोधपत्र और पाँच दर्जन से अधिक लेख प्रकाशित हैं। मैंने सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव / अमृतकाल पोर्टल हेतु ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अखण्ड बुन्देलखण्ड का योगदान’ विषय पर 23 कहानियाँ लिखी हैं। जब 26 नवम्बर 2025 को वीसी कमेटी हॉल, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश हेतु मेरा साक्षात्कार हुआ। तब साक्षात्कार के दौरान मेरे मौलिक लेख और शोध-कार्य से प्रभावित होकर बाह्य विशेषज्ञ ने कहा कि - “बेटा! तुम तो पीएचडी से ज्यादा काम कर चुके हो। तुम बहुत प्रतिभाशाली हो। तुम जैसे शोधार्थी अकादमिक जगत में विश्वविद्यालय का नाम अवश्य रोशन करेंगे।”
महोदया, आपको मैं यह भी अवगत कराना चाहता हूँ कि मैंने विश्वविद्यालय द्वारा गोरखपुरिया पूर्वांचली प्रोफेसर के दबाव के कारण मेरी फीस जमा करने हेतु अब तक पोर्टल नहीं खोले जाने पर 24 दिसंबर 2025 से 27 दिसंबर 2025 तक बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन, की अनुमति से मोदी सेना के बैनर तले विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर व्यक्तिगत सत्याग्रह किया था। मेरे सत्याग्रह का नाम है - बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रह / पढ़ाई की लड़ाई। मेरे सत्याग्रह को स्थानीय अखबारों, स्थानीय न्यूज चैनलों के साथ ही राष्ट्रीय न्यूज चैनलों, समाचार एजेंसियों ने कवर किया है और सोशल मीडिया पर जाने-माने राजनेताओं, छात्रनेताओं, पत्रकारों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने मेरे समर्थन में लिखा है।
मेरे सत्याग्रह करने पर बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी के श्रीमान कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने दैनिक जागरण, झाँसी की 25 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में कहा - “विश्वविद्यालय में सारी प्रक्रिया निष्पक्ष है। इस छात्र का चयन भी हुआ है, लेकिन आरडीसी कमिटि ने निर्णय में कमेण्ट किया है। उसी कमेण्ट को लेकर परिणाम जारी किया गया है। उस कमेण्ट की जाँच चल रही है। इसके बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। प्रोफेसर के दबाव में एडमिशन रोकने के आरोप निराधार है। विश्वविद्यालय में किसी के दबाव में कोई नहीं होता है।”
27 दिसंबर 2025 की दैनिक जागरण, झाँसी में मेरे पीएचडी प्रवेश मामले में यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई -
हैडलाइन :“पीएचडी के लिए चयनित गिरिजाशंकर को प्रवेश देने के लिए हुई कमिटि की बैठक”
झाँसी : बुन्देलखण्ड विवि की शैक्षणिक सत्र 2025-26 के पीएचडी के लिए चयनित गिरिजा शंकर कुशवाहा को कोर्स वर्क में प्रवेश देने के लिए बनी कमिटि की बैठक आज कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कुलसचिव के साथ परीक्षा नियन्त्रक, दो वरिष्ठ शिक्षकों की टीम ने विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित करने के लगे आरोपों तथा विश्वविद्यालय की रिपोर्ट पर चर्चा की। बैठक में नेट क्वॉलिफाई अभ्यर्थी को प्रवेश देने के लिए अगली बैठक 3 जनवरी को होगी। इस बैठक के निर्णय के बाद ही अभ्यर्थी की शुल्क जमा कराने के लिए निर्णय लिया जाएगा। अभी तक शुल्क जमा कराने के लिए 27 दिसम्बर तय है, लेकिन यदि कमिटि ने अभ्यर्थी को प्रवेश देने की संस्तुति की, तो इसके लिए अलग से शुल्क जमा करने का विकल्प दिया जाएगा। इधर, अभ्यर्थी ने आज भी दिन में धरना देकर पीएचडी में प्रवेश देने के लिए सभी योग्यता हासिल होने के बाद भी प्रवेश देने के लिए शुल्क जमा नहीं कराने का विरोध गिया।
(अब 3 जनवरी को होगी बैठक, समिति की संस्तुति मिलने पर फीस जमा करने का अलग से दिया जाएगा विकल्प)
“हिन्दी विभाग के शिक्षकों के झगड़े में प्रवेश पाने में फँसा पेंच”
विश्वविद्यालय परिसर में इस बात की चर्चा सरगर्म है कि हिन्दी विभाग में दो वरिष्ठ शिक्षकों के बीच चल रहे झगड़े का शिकार हिन्दी विषय से पीएचडी के लिए. चयनित गिरजाशंकर हो गया और उसके प्रवेश में पेंच फंस गया। एक शिक्षक के पक्ष में सोशल साइट में समर्थन करने वाले गिरिजाशंकर ने अपने लेख में शिक्षक के साथ-साथ विश्वविद्यालय को भी घेरे में ले लिया। पीएचडी में प्रवेश होने के लिए साक्षात्कार में यह मुद्दा उठा, लेकिन विशेषज्ञ ने उसे उत्तीर्ण कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से उसका प्रवेश प्रोविजनल कर दिया गया। अब यह मुद्दा शिक्षकों के आपसी विवाद से विश्वविद्यालय की छवि से जुड़ गया है।
महोदया, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के पूर्व संपत्ति अधिकारी और खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के आचार्य प्रो० डी० के० भट्ट की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जाँच समति गठित की गई। 02 जनवरी 2026 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा पत्रांक : बु०वि०/शोध सेल/2026/3829 नामक आदेश जारी किया गया, जो इस प्रकार है -
प्रापक,
श्री गिरजाशंकर कुशवाहा पुत्र श्री हीरालाल कुशवाहा
पता - 345/10सी, सतेन्द्र जरबौ वाले, खुशीपुरा, आर्मी पार्क के पास, झांसी।
विषय :- हिन्दी विषय की शोध काउन्सलिंग समिति की बैठक दिनांक 26/11/2025 के निर्णय के सम्बन्ध में।
हिन्दी विषय की शोध काउन्सलिंग समिति की बैठक दिनांक 26/11/2025 में आपके चयन के सम्बन्ध में समिति द्वारा निम्न संस्तुति की गयी सामान्य श्रेणी के क्रमांक 07 पर अंकित अभ्यर्थी गिरजाशंकर कुशवाहा द्वारा विश्वविद्यालय के विरूद्ध आपत्तिजनक पोस्ट जारी की गयी। उक्त कृत्य विश्वविद्यालय की आचार संहिता के विरूद्ध है। इस सम्बन्ध में एक समिति गठित कर छात्र के प्रवेश दिए जाने पर विचार किया जाना उचित होगा।
अतः समिति की उक्त संस्तुति के क्रम में विश्वविद्यालय पत्रांक बु०वि०/ शोध सेल/2025/3794 दिनांक 19/12/2025 द्वारा गठित जांच समिति की प्रस्तावित बैठक दिनांक 03/01/2026 को हजरत अली जयन्ती का अवकाश घोषित होने के कारण आप दिनांक 07/01/2026, को समय 3.00 बजे समिति के समक्ष अपने प्रतिउत्तर एवं साक्ष्यों सहित उपस्थित होना सुनिश्चित करें।
परीक्षा नियंत्रक
प्रतिलिपि :- निम्नांकित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित।
1. उपकुलसचिव (एकेडमिक)।
2. कुलपति जी के निजी सचिव को माननीय कुलपति जी के अवलोकनार्थ।
3. कुलसचिव/ परीक्षा नियंत्रक के आशुलिपिक।
परीक्षा नियंत्रक
महोदया, उक्त पत्र ईमेल पर प्राप्त होने पर मैं 07 जनवरी 2026 को जाँच समिति के समक्ष उपस्थित हुआ। समिति में माननीय अध्यक्ष प्रो० डी० के० भट्ट के द्वारा पूँछे गए सारे सवालों का मैंने मौखिक और लिखित जवाब दिए। आज 07 फरवरी को एक माह हो गया है, लेकिन समिति का कोई निर्णय नहीं आया है। मैं हर दूसरे-तीसरे दिन अपने समिति के सदस्यों, शोध सेल से अपने पीएचडी प्रवेश मामले को लेकर मिलता आ रहा हूँ। 05 फरवरी 2026 को मैं अपनी जाँच समिति के माननीय अध्यक्ष प्रो० डी० के० भट्ट से उनके विभागीय चैम्बर में मिला और अपने पीएचडी प्रवेश संबंध में बातचीत की तो उनका कहना रहा कि - “जाँच चल रही है, विश्वविद्यालय तुम्हारे हिसाब से नहीं चलेगा, विश्वविद्यालय अपना काम कर रहा है, उसे जो करना है।”
महोदया, जाँच समिति की अध्यक्ष प्रो० डी० के० भट्ट जी समिति के अन्य दो सदस्यों के साथ ही माननीय कुलपति और कुलसचिव समेत किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की कोई बात नहीं सुन रहे हैं और अपनी मनमानी के चक्कर में मेरे वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मैं 05 दिसंबर 2025 से ही मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण का शिकार हो रहा हूँ। उनको मेरे वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के साथ ही मेरा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण करने का अधिकार किसने दिया। मैं वैचारिक रूप से बहुत सशक्त हूँ। मैं अपने मौलिक अधिकार लेकर रहूँगा। महोदया, अतः मेरा आपसे निवेदन है कि जाँच समिति की अध्यक्ष और पूर्व संपत्ति अधिकारी प्रो० डी० के० भट्ट द्वारा मेरे वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के साथ ही मेरा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण करने पर उच्च स्तरीय जाँच समिति गठित की जाए और उन पर लगे सारे आरोपों की जाँच की जाए, तभी मुझे उचित न्याय मिलेगा।
प्रार्थना -
महोदया आपसे विन्रम निवेदन है कि निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार किया जाए -
(1) बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में मेरा पीएचडी प्रवेश सुनिश्चित हो।
(2) मेरा पीएचडी प्रवेश शुल्क छात्र कल्याण कोष / पीएम ऊषा (मेरू) कोष से जमा होना सुनिश्चित हो।
(3) मेरे पीएचडी प्रवेश में बाधा डालने वाले और षड्यंत्र रचने वाले प्रोफेसरों और अधिकारियों पर तत्काल उच्च स्तरीय जाँच कमेटी गठित की जाए और उनको उचित दण्ड देते हुए कार्यवाही करके मेरे साथ न्याय किया जाए।
(4) पीएचडी प्रवेश में रुकावट के कारण मेरी मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक क्षति की विश्वविद्यालय द्वारा क्षतिपूर्ति की जाए।
(5) जाँच समिति गठित कराने वाले व्यक्ति का विवरण हमें प्राप्त हो।
(6) जाँच समिति, सिर्फ मेरे प्रवेश पर ही क्यों गठित की गई है, इसका स्पष्टीकरण मुझे प्राप्त हो।
(7) मेरे पीएचडी प्रवेश मामले की फाइल के समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति मुझे सौंपी जाए।
(8) जाँच समिति ने अब तक क्या कार्यवाही की, कार्यवाही की प्रति मुझे सौंपी जाए
(9) मेरे प्रवेश हेतु हुए साक्षात्कार के पैनल / विषय विशेषज्ञ का विवरण मुझे प्राप्त हो।
(10) मेरे प्रवेश हेतु साक्षात्कार के बाद पैनल द्वारा की गई टिप्पणी की छायाप्रति मुझे प्राप्त हो।
(11) मेरी मेरिट जारी की जाए और मुझे साक्षात्कार में 30 में से कितने अंक मिले, ये जानकारी मुझे प्रदान की जाए।
(12) मेरे प्रवेश हेतु साक्षात्कार की सीसीटीवी वीडियो रिकॉर्डिंग मुझे प्राप्त हो।
महोदया, मेरा पीएचडी प्रवेश 05 दिसम्बर 2025 से ही माना जाए ताकि मैं 36 महीने में अपना शोध कार्य पूरा करके पीएचडी उपाधि अर्जित कर सकूँ और अकादमिक जगत में अपना कैरियर बना सकूँ। एक निवेदन और है कि आप मेरी अकादमिक योग्यता और उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए मेरे लिए रोजगार की व्यवस्था करने पर भी विचार करें। जब पीएचडी प्रवेश में ही मुझे इतना परेशान होना पड़ रहा है तो स्थायी रोजगार हेतु कितना परेशान होना पड़ेगा। मैं भी राज्य की सेवा करना चाहता हूँ। अतः मुझे सेवा का एक अवसर प्रदान करने की कृपा करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मुझे आपके दरबार से न्याय मिलेगा। मैं आपका सदा आभारी रहूँगा।
दिनांक - 07 फरवरी 2026
स्थान - झाँसी
प्रार्थी -
गिरजाशंकर कुशवाहा ‘कुशराज’
(बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश हेतु संघर्षरत बुंदेलखंडी युवा, बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रही, एडवोकेट, इतिहासकार : सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, अध्यक्ष : मोदी सेना - कुशराजवादी)
मो. : 9569911051, 8800171019
ईमेल : kushraazjhansi@gmail.com
पता : 212, नन्नाघर, जरबौ गाँव, बरूआसागर, झाँसी, बुन्देलखण्ड, उत्तर प्रदेश - 284201
संलग्न -
(1) बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा 05 दिसंबर 2025 को जारी पत्रांक - बु०वि०/शोध सेल/2025/3768
(2) पीएचडी कोर्सवर्क हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची में पेज 8 पर क्रमांक 191 पर मेरा परिणाम
(2) 05 दिसंबर 2025 को जारी पत्रांक - बु०वि०/शोध सेल/2025/3769 के अंतर्गत प्रकाशित शुद्धि पत्र
(3) पीएचडी कोर्सवर्क हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची में संशोधित पेज 8 पर क्रमांक 191 पर मेरा संशोधित परिणाम
(4) दैनिक जागरण, झाँसी की 25 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट
(5) अमर उजाला, झाँसी की 25 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट
(6) दैनिक जागरण, झाँसी की 27 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट
(7) मुझे जाँच समिति के समक्ष उपस्थित होने हेतु प्राप्त बुलावा पत्र
प्रतिलिपि, सादर प्रेषित -
(1) महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली President of India
(2) माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली PMO India Narendra Modi
(3) माननीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग / यूजीसी, नई दिल्ली University Grants Commission
(4) माननीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली Ministry of Education
(5) माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली Ministry of Social Justice and Empowerment, Government of India
(6) माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ MYogiAdityanath
(7) माननीय शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ
(8) माननीय कुलपति, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी Prof. Mukesh Pandey
(9) श्रीमान कुलसचिव, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(10) श्रीमान परीक्षा नियंत्रक, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(11) श्रीमान अधिष्ठात्ता एवं निदेशक (शोध), बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(12) श्रीमान अधिष्ठाता छात्र कल्याण, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(13) श्रीमान कुलानुशासक, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(14) श्रीमान उपकुलसचिव (शोध),
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(15) श्रीमान प्रो० डी० के० भट्ट (अध्यक्ष - जाँच कमेटी, गिरजाशंकर कुशवाहा - पीएचडी प्रवेश मामला), बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी
(16) श्रीमान प्रशासनिक अधिकारी (शोध),
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी




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