'पढ़ाई की लड़ाई' का लेखन शुरू - कुशराज
'पढ़ाई की लड़ाई' का लेखन शुरू
पूजनीया पुरखिन राष्ट्रमाता किसानिन सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर आज 10 मार्च 2026 से हम 'पढ़ाई की लड़ाई' का लेखन शुरू कर रहे हैं। 'पढ़ाई की लड़ाई' में लिखा जा रहा है हम जैसे बुंदेलखंडी किसान के बेटे का शिक्षा के लिए संघर्ष और 21वीं सदी के भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की अनकही कहानी।
'पढ़ाई की लड़ाई' लड़ी जा रही है वीरभूमि झाँसी-बुंदेलखंड के झाँसी विश्वविद्यालय की रणभूमि में। इस लड़ाई का मुद्दा है - विश्ववीर महाराज कुश के वंशज और बुंदेलखंड के एकलव्य किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज' का शोध उपाधि (पीएचडी) में प्रवेश रोकना और फिर कुशराज द्वारा गुरू कृपाचार्य 'प्रोफेसर किसुनलाल त्रिवेदी' और गुरू द्रोणाचार्य 'प्रोफेसर रविंद्र निगम' की छात्रविरोधी राजनीति का छात्रहितैषी राजनीति से जबाव देना।
हम आज के एकलव्य अपने जीवन संघर्ष की कहानी और अपनी किसान जातियों का इतिहास लिख रहे हैं क्योंकि हम जान गए हैं कि हमारे लिखने से हम जैसे एकलव्य और उसके साथियों के साथ ही उसकी आने वाली पीढ़ियों से अँगूठा नहीं माँगा जाएगा। अँगूठा माँगने वाले द्रोणाचार्य और उसके सलाहकार कृपाचार्य की किसान छात्र-छात्रा विरोधी हर कोशिश असफल होगी क्योंकि आज के एकलव्य ने तीर-कमान की जगह कलम-किताब को अस्त्र-शस्त्र बना लिया है और वो कलम और किताब से बदलाओकारी क्रांति की पटकथा लिखने जा रहा है।
अगले रविवार को पढ़िए - 'पढ़ाई की लड़ाई' का प्रकरण-1 .............
©️ किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज'
(बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी में पीएचडी प्रवेश हेतु संघर्षरत बुंदेलखंडी युवा और बुंदेलखंडी शोधार्थी सत्याग्रही)
10 मार्च 2026
झाँसी, अखण्ड बुन्देलखण्ड




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