झाँसी के बुंदेलखंड कॉलेज को मिले बुंदेलखंड राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा - कुशराज

बुन्देलखण्ड कॉलेज, झाँसी (बीकेडी) के 78वें स्थापना दिवस (12 जुलाई 2026) पर गुरुजनों, प्रोफेसरों, पुरातन छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को भौत-भौत शुभकामनाएं 💐🌾🎉🖋️📚🎓🤝❤️


बीकेडी के 78वें स्थापना दिवस पर विशेष लेख - 

झाँसी के बुंदेलखंड कॉलेज को मिले बुंदेलखंड राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा




आधुनिक बुंदेलखंड के इतिहास, आधुनिक भारत के इतिहास और अकादमिक जगत के इतिहास में भारत की आजादी के दो वर्ष बाद 12 जुलाई सन 1949 में बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी की स्थापना होने से नए युग का सूत्रपात हुआ। बुंदेलखंड कॉलेज की स्थापना अंबिकाप्रसाद सक्सेना रज्जन बाबू, प्रोफेसर क्रांतिवीर डॉ. भगवानदास माहौर, प्रोफेसर शेरसिंह कोठारी, प्राचार्य सुखस्वरूप ने समाजसेवियों और जनता के आर्थिक सहयोग से की थी। बुंदेलखंड कॉलेज बीकेडी नाम से चर्चित है। इसे बुंदेलखंड कालिज और बुन्देलखण्ड महाविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। झाँसी का बुंदेलखंड कॉलेज बुंदेलखंड में उच्च शिक्षा का अग्रदूत है। इसने बुंदेलखंड में शिक्षा के समस्त संस्थानों का मार्गदर्शन किया है। चाहे वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर हो या फिर बुंदेलखंड के अन्य महाविद्यालय, संस्थान और विद्यालय। यह महाविद्यालय अखंड बुंदेलखंड का प्राचीन महाविद्यालय है। प्रारंभ में महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय, आगरा से और फिर कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर से संबद्ध रहा। वर्तमान में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी से संबद्ध है। शुरूआत में बुंदेलखंड कॉलेज को कला संकाय के इन विषयों की मान्यता मिली थी - हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, दर्शनशास्त्र, गणित इत्यादि। सन 1961 से विधि की शिक्षा प्रदान करके बुंदेलखंड कॉलेज समाज को न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में बुंदेलखंड कॉलेज प्राचार्य प्रो. एस.के. राय के नेतृत्व में ग्वालियर रोड, सिविल लाइंस झाँसी, अखंड बुंदेलखंड में स्थित भव्य भवन के हरित और स्वच्छ परिसर में कला, वाणिज्य, विधि और शिक्षा संकाय में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध उपाधि न्यूनतम शुल्क में प्रदान कर रहा है। कला संकाय में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, गणित, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, भूगोल, मनोविज्ञान इत्यादि विषयों में बी.ए. पाठ्यक्रम और हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल, गणित, मनोविज्ञान में एम.ए. और पी-एचडी. पाठ्यक्रम, वाणिज्य संकाय में बी.कॉम., एम.कॉम. और पी-एचडी. पाठ्यक्रम, विधि संकाय में एल-एलबी, एल-एलएम और पी-एचडी पाठ्यक्रम, शिक्षा संकाय में बी.एड., एम.एड. और पी-एच.डी. पाठ्यक्रम संचालित हैं। बुंदेलखंड कॉलेज में कभी 24 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययन करते थे लेकिन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की नई नीतियों के चलते वर्तमान में लगभग 6 हजार छात्र-छात्राएं ही अध्ययनरत हैं। बुंदेलखंड कॉलेज को नैक मूल्यांकन कराने वाला बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का पहला कॉलेज होने का गौरव प्राप्त है। इसे बी ग्रेड प्राप्त है। साथ ही इस कॉलेज को दीक्षांत समारोह आयोजित करने वाले प्रथम कॉलेज होने का भी गौरव प्राप्त है। बुंदेलखंड कॉलेज राजनीति की पौधशाला मानी जाती है। यहाँ के छात्र नेताओं और छात्रसंघ अध्यक्षों ने विधायक, सांसद, मंत्री बनकर जनसेवा में अविस्मरणीय योगदान दिया है। यहाँ के पुरातन छात्र रहे राजनेताओं में हरगोविंद कुशवाहा, प्रदीप जैन आदित्य, डॉ. बाबूलाल तिवारी, भानुप्रताप सिंह वर्मा, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, डॉ. अनुराग शर्मा, दीपनारायण सिंह उर्फ दीपक यादव, रवि शर्मा, राकेश गोस्वामी, प्रदीप सरावगी इत्यादि के नाम प्रमुख हैं। सन 2017 के छात्रसंघ चुनाव के बाद से अब तक बुंदेलखंड कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा हुआ है इसलिए अखंड बुंदेलखंड को नए छात्रनेता और राजनेता नहीं मिल पा रहे हैं लेकिन शिक्षक नेता धड़ल्ले से मिल रहे हैं। यहाँ के पुरातन छात्र-छात्रा उपर्युक्त राजनेताओं के अलावा साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा, पत्रकार मोहन नेपाली, आलोचक डॉ. शिवजी श्रीवास्तव, इतिहासकार देवेंद्र कुमार सिंह, अभिनेता आरिफ शहडोली, रंगकर्मी माताप्रसाद शाक्य, किसानवादी लेखक किसान गिरजाशंकर कुशवाहा कुशराज रहे हैं। तो वहीं यहाँ प्रोफेसर राजेंद्र सिंह, प्रोफेसर अरविंद अग्रवाल, प्रोफेसर डी.के. मिश्रा, प्रोफेसर श्रीकांत यादव, प्रोफेसर डी.पी. गुप्ता, प्रोफेसर संजय सक्सेना जैसे आदर्श प्रोफेसरों ने सेवाएं दी हैं। बुंदेलखंड कॉलेज अखंड बुंदेलखंड का एकमात्र कॉलेज है, जिसका अपना कुलगीत है। कॉलेज की स्थापना के 76 वें वर्ष में हिंदी विभाग, बुंदेलखंड कॉलेज के अध्यक्ष आचार्य नवेन्द्र कुमार सिंह द्वारा रचित कुलगीत को अपनाया गया। कुलगीत की पंक्तियां इस प्रकार हैं - गीता की गूँज यहाँ वीणा की तान है। / कॉलेज हमारा बुंदेलखंड की शान है।। / हम हैं महान मेरा गुरुकुल महान है। / विद्या का वरदान, गौरव - गान है।। 12 जुलाई 2025 को बुंदेलखंड कॉलेज के 77वें स्थापना दिवस पर पुरातन छात्र समिति बुंदेलखंड कॉलेज (बीकेडियन्स) द्वारा पुरातन छात्र सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। पुरातन छात्र समिति के अध्यक्ष प्रदीप सरावगी और छात्रसंघ अध्यक्ष ब्रजेन्द्र सिंह यादव भोजला ने अतिथियों का स्वागत किया था। समारोह में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, छात्रनेता रहे जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त प्राध्यापकों, यूजीसी नेट और समस्त पाठ्यक्रमों के सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान कॉलेज के कोठारी हॉल के जीर्णोद्धार हेतु पुरातन छात्र झाँसी महापौर बिहारीलाल आर्य ने 2 करोड़ रुपए और विधान परिषद सदस्या रमा निरंजन ने 25 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। मुंबई से पधारे प्रसिद्ध गजल गायक पुरातन छात्र जसवंत सिंह ने वक्त का परिंदा रुका है कहाँ जैसी शानदार गजलें सुनाकर मन मोहा था। यह दिवस बुंदेलखंड के आधुनिक इतिहास का स्वर्णिम दिन का था। इस दिन अखंड बुंदेलखंड के राजनेता, शिक्षाविद, कानूनविद और समाजसेवी एक मंच पर विराजमान थे। पुरातन छात्र सम्मेलन में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों में परमेश्वरी नारायण श्रीवास्तव, मोहनजी गुप्त, विष्णुकांत अग्रवाल, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, ओमप्रकाश तिवारी, काशीनाथ श्रृंगीऋषि को सम्मानित किया गया तो वहीं कार्यक्रम के अतिथि पुरातन छात्र रहे राजनेताओं में डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, प्रदीप जैन आदित्य, पवन गौतम, दीपनारायण सिंह उर्फ दीपक यादव, डॉ. रवीन्द्र शुक्ल, गयादीन अनुरागी को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही बुंदेलखंड कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. केशभान सिंह पटेल, प्रबंधक एडवोकेट मनोहरलाल वाजपेयी, प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य राजीव शर्मा, रामप्रकाश अग्रवाल को सम्मानित किया गया। महाविद्यालय की विभूति सम्मान से हरगोविंद कुशवाहा, लक्ष्मीकांत वर्मा, मोहन नेपाली, नरेंद्र वैद्य, सुबोध खाण्डेकर, मो. उस्मान सिद्दीकी, परशुराम यादव, श्वेतांक तिवारी, आर.के. शर्मा, अलखप्रकाश साहू, राजेश पटैरिया, कामिनी बघेल, प्रोफेसर आर.सी. श्रीवास्तव सम्मानित किए गए। वहीं मेधावी सम्मान से शुभि यादव, गिरजाशंकर कुशवाहा, सत्यम राज, गिरीश कुमारी पाल, ज्योति आर्य, हिमांशु बांगर इत्यादि को कॉलेज टॉपर एवं यूजीसी नेट उत्तीर्ण करने की उपलब्धि हेतु सम्मानित किया गया। बुंदेलखंड कॉलेज झाँसी की 77 वर्ष की गौरवशाली यात्रा बुंदेलखंडी शिक्षा व्यवस्था का युगांतकारी युग है और भारतीय शिक्षा व्यवस्था का स्वर्णिम युग है। 12 जुलाई 2026 को बुंदेलखंड कॉलेज 78वां स्थापना दिवस मना रहा है। हम चाहते हैं कि बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी को भारत सरकार के अधीन केन्द्रीय विश्वविद्यालय / राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान - बुंदेलखंड राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, झाँसी का दर्जा दिया जाए। वर्तमान बुंदेलखंड कॉलेज परिसर को पुराना परिसर और बुंदेलखंड राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के नवीन परिसर को नया परिसर बनाया जाए ताकि झाँसी विज्ञान की राजधानी के साथ ही ज्ञान की राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित हो सके।

© किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज'

(पुरातन छात्र - बीकेडी / शोधार्थी - हिन्दी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी)

12 जुलाई 2026, झाँसी

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