बुंदेली कहानी : महिन्द कक्का - कुशराज
बुंदेली कहानी
“महिन्द कक्का”
© कुशराज
(किसानवादी आलोचक / शोधार्थी - हिन्दी विभाग बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी)
पता - 212, नन्नाघर, जरबौगांव, बरूआसागर, झाँसी, अखण्ड बुन्देलखण्ड - 284201
मो. - 9569911051, 8800171019
ईमेल - kushraazjhansi@gmail.com
ब्लॉग - कुसराज की आबाज
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अरे! राम-राम......................
भौतई दुखभरी खबर है। आज भुनसारें साढ़े चार बजें कछियाने के किसान महेंद सिंघ कुसबाहा नईं रए। पूरौ बलदेवपुरा गाँव इनें ‘महिन्द कक्का’ कैऊत तो। छप्पन साल की उमर में सरग सिधारे हैं महिन्द कक्का।
गौऊंवन बरन, गूदगुदारे चैरे की छै फुट की नौंनी कदकाठी पे लामौं कुरता-पजामा, सदरी, किसानी मुड़ाछौ उर कुरता की ऊपरी खलेती में खुरसो पेन उर बई खलेती में रक्खी डायरी भौत जँचत ती बिन पे। कभऊँ-कभार सदरी के संगे सफेद धोती उर कुरता भी पैनत ते। करिया सदरी भौतई पसंद हती बिनें।
महिन्द कक्का के मिलनसार सुभाव, तेजसबी मन, बिकास करबैबाय नेता उर दानी जैसे गुनन सें कौऊ भी बगैर पिरभावित भएं नईं रैत तो। बिनकै नौंने कामन उर पंचयाती फैंसलन की झाँसी जिले के बूढ़े-बारे, बऊ-बिटियाँ, युबा-युबतियाँ, लोग-जनीमाँनसें, पत्तकार, नेता, अधिकारी, बकील उर पुलस सबई तारीफ करत हैंगे। बिनकै कामन सें हर कौऊ गाँव, समाज उर देस कौ बिकास करबै खों पिरेरित है।
गड़रियाने कौ महेस पाल महिन्द कक्का के निधन पे सोक जताबै के बाद बिनके द्वाराँ करै गए महाँन कामन खों याद करकैं अपनी लुगाई रेखा सें बतकाओ कर रओ तो। रेखा के ब्याव खों अबै छैई मईनाँ भए ते - “महिन्द कक्का, अपने बलदेवपुरा गाँव के तीन पंचबरसी पिरधान रए। अपनी पिरधानी में गाँव की हर कच्ची गली पे पक्की सड़क डरवाई। खेत के कच्चे सेक्टरन खों भी पक्कौ करवाओ। सिरकारी पाइपलैन बिछवाकें पेयपानूँ की समस्या दूर भगाई। ईसें पैलें जनीमाँनसन उर मौंडियन खों पीबे उर खर्च कौ पानूँ भरबे डेढ़-दो किलोमीटर दूर जानें परत तो। गाँव में सैकारी समिती उर बीज भंडार खुलवाओ, जीसें किसानन खों समै पे खाद उर बीज मिल पाए। किसानन खों खाद उर बीज की कमी की बजय सें कौनऊँ नुकसान नईं झेलनें परै। बैसेंईं पिरकिती की मार उर पूँजीबादी काले कारनामन सें भौत तकलीफ में रैउत हमाए किसान। महिन्द कक्का नें गाँव के हर तरा के मामले पंचयात में निबटाए। कौनऊँ मामले में काऊ खों थाने उर कचेरी के चक्कर नईं लगानें परै। बे केऊत ते - अगर तुम औरें छुटपुट, घर-परबार, मुहल्ला-पड़ोस के आपसी झगड़न खों लेकें पुलस के चक्कर में परहौ तौ रपोट लिखाबे मेंईं पाँच-दस बोरा पिसी बिक जै। बगैर रिसपत के रपोट लिखत काँ हैं आजकल्ल। पुलस की हालत तौ कुत्तन सें भी बुरई है, कुत्ता तौ बफादारी करत लेकन पुलस नईं। कोट-कचेरी जाऊत-जाऊत बरसें गुजर जैं, चप्पलें घिस जैं बकील की फीस भरबै में। महिन्द कक्का सिक्छा के मिहत्तव खों खूब समजत ते उर सबरे गाँवबारन खों भी समजाऊत ते। बिन्नें खुद पिरयागराज जगताईग्यानपीठ सें बी०ए० की डिगरी लई ती। बे अपने जमाने के बरूआसागर इलाके के सबसें जादां पढ़े-लिखे उर अनुभबी इंसान हते। बे सिक्छा खों हर व्यक्ति के जीबन में तरक्की लाबै उर समाज में बदलाओ लाबै, गाँव, समाज उर देस की तरक्की के लानें इकलौतो सकतीसाली हतियार मानत ते, ऐईसें बिन्नें गाँव के गरीबन, किसानन, मजूरन के मौंडा-मौंडियन खों गाँव मेंईं नौंनी सिक्छा मिलबै, ईके लानें गाँवबारन खों संगे लैकैं कलक्टर सें लैकैं राज्ज सिरकार लौक बदलाओकारी पहिल की उर गाँव में सिरकारी इंटर कालेज के लानें राज्ज सिरकार सें बजट की मंजूरी कराई। सिद्द बब्बा के पार तरैं ग्रामसभा की चार एकड़ बंजर भूम पे इंटर कालेज बनबौ तै भओ। हम गाँवबारन की माँग पे इंटर कालेज कौ नाँव ‘गाँवसेबी महेन्द सिंह कुसबाहा किसान इंटर कालेज, बलदेवपुरा, झाँसी, अखंड बुंदेलखंड’ रखौ गओ। पिछली साल सें यी इंटर कालेज में कक्छा नौं सें बारा लौक कला, बिग्यान, बानिज्ज उर किरसी संकाय में पढ़ाई सुरूँ हो गई ती। अब बारबीं लौक मौंडा-मौंडी गाँव मेंईं पढ़ाई कर रए हैं उर अपने परबार के संगे अपनौं भबिस्य संवार रए हैंगे। इंटर कालेज बनबै सें सबसें जादां फायदा मौंडियन खों भओ कायकि गाँव सें दूर पढ़बे बिनके मताई-बाप बड़ी मुसकिल में भेजत ते। अब हर मताई-बाप अपनी बिटियंन की पढ़ाई खों लेकें जागरुक हो रए उर बिटिया खों हर हाल में पढ़ाबौ चा रए। बे औरें अपनी बिटिया सें घर कौ कौनऊँ भी काम चूलौ-चौका बगैरा उर हार-खेत कौ काम कराबै की बजाए उए पढ़ाई में मगन रखतई। बिन्नें बिटिया खों पंदरा-बीस हजार कौ स्मार्टफोन भी लिबवा दओ। जीसें बिटिया ऑनलैन पढ़ाई कर पाए उर दुनियाँ में पिरिचलित सिक्छा-बिबस्ता सें कदम सें कदम मिलाकैं चल पाए। बा जज, कलक्टर, डागडर, बकील, इंजीनियर, पिरोफेसर बनकैं गाँव उर समाज कौ मान बढ़ा पाए।”
महिन्द कक्का के सरग सिधारबे सें बलदेवपुरा में गमी के बदरा फूट परै। कक्का के घरै हजारन गाँवबारे फूट-फूटकैं रो रए। रोऊत-रोऊत कछू जनींमाँनसें उर कछू जनें दत्ती बंदबे सें गस्त खाकैं गिर परै। कक्का के जाबे सें हर कौऊ दुखी हैगो। चीख-चीखकें रोबेबारे आदमियन उर जनींमाँन्सन की जे आबाजें आ रईं - “हे भगवान! तुमनें इतैक जलदीं काय बुला लओ हमाए कक्का खों। अबै पाँच-दस साले उर रैन दैउते हमाए संगे तो हम औरन की जिन्दगानी उर सुदर जाती। हमाए मौंडी-मौंडन खों भी कक्का बकील, डागडर, कलक्टर, अफसर बनत देख लैउते.......।”
महिन्द कक्का के साथी सिद्देसुर माते भी फूट-फूटकैं रो रए। बिनें भी महिन्द कक्का के जाबे कौ उतैकई दुख है, जितैक हर गाँवबारे खों है लेकन बे सबखों समजा रए - "होनी खों कौऊ नईं टार सकत। परमात्मा भी नईं। होनी तो होकैं रैउत। मताई की कोख सें जनम लैकें संसार में अबाई, सुख-दुख भोगबौ, जरूरतमंद इंसानन की सिहायता करबौ, नाँव कमाबौ उर फिर मित्तू होबै पे संसार सें बिदाई, जे सब बिधि कौ बिधान हैगो। मित्तू खों कौऊ नईं टार सकत जैसें जनम खों कौऊ नईं टारत। एक दिनाँ सबखों जानें भगवान के पास लेकन सबई जनें महिन्द भज्जा जैसे करम करकैं जाएँ तौ ई धरती लोक सें सरग लोक में उनें सदियन लौक सुमरो जैहै। तुम सब जनें सांती रक्खो उर महिन्द भज्जा की आत्मा की सांती के लानें ईसुर सें बिनती करौ। बिनें सादर सिरद्धांजली अर्पित करौ.......।"
कासी की बनारस हिन्दू जगताईग्यानपीठ सें राजनीत बिग्यान में एम०ए० करबैबारो गाँव कौ हौनहार युबा रमन रैकवार भी फूट-फूटकैं रो रओ उर सिद्देसुर माते सें कै रओ - "हओ कक्का। इंसान खों अपने महिन्द कक्का जैसौ होएँ चज्जे। जीबन में उन जैसे नेक काम करैं चज्जे। कायकि दुनियाँ में सिरफ इंसान कौ नाँव रै जाउत। जीबन भर जौंन इंसान जैसे करम करतई, बैसेई फल भुगततई। अगर कौनऊँ बुरए करम करतई, गरीबन, किसानन, मजूरन की दबंगयाई करकैं, डरा-धमकाकें जमीनें हडपतई, उनके घरन पे जबरन कब्जा करतई, नाजायज बियाज लैउत, लोगन की मजबूरी कौ फायदा उठाउत, बैन-बेटियंन खों बुरई नजर सें देखतई, गुंडागिरदी करकैं भोले-बाले इंसानन, सीदी-सादी औरतन पे रौब झाड़त तौ बौ भौत बुरई मौत मरत, पुलस एनकांउटर में मारत उए बिकास दुबै उर माफिया बिधायक अतीक ऐमद के बेटे असद की तराँ। माफियंन के घर पे बिल्लोजर चलत अब योगी बाबा के राज में.......।"
महिन्द कक्का गाँव के मुखिया हते, सबकौ सुक-दुख में ध्यान रखत ते। अब बिन मुखिया के कैसें चलहैं घर.......?
बिनकी इकलौती बिटिया हैगी मेघना सिंघ कुसबाहा यादब। झाँसी जिला न्यायालय में बकालत करतई। घरबाय उर गाँवबारे लाड़ सें उए 'मेघू जिज्जी' कैऊत। मेघना नें दिल्ली जगताईग्यानपीठ के मिरांडा हाऊस कालेज सें बी०ए० ऑनर्स समाजसास्त्त की डिगरी लई है। ऊनें जगताईग्यानपीठ में सर्बोच्च अंक पाकें सोनपदक भी जीतो हतो उर 'बदलाओकारी छात्तरा पंचयात' संगठन बनाकैं छात्तराबास में रात खें पिरबेस करबै कौ समै बढ़ाबै, मैस में भोजन की गुनबत्ता, कालेज में सुद्द पेयपानूँ की बिबस्ता, हिंदी में अध्ययन सामगरी की उपलब्धता जैसे मुद्दन खों लैकैं छात्तरा-अधिकारन की लड़ाई लड़कैं दिल्ली जगताईग्यानपीठ छात्त संघ चुनाओ में सचिब पद पे बिजैसिरी पाई ती।
ऊनें दिल्ली में इन तीन बरसन में महिला की आजादी पे पाबंदी लगाबौ, महिला खों पुरुसन के अधीन रखबौ, उनें पुरुसन सें कम अधिकार दैबौ उर कमतर आँकबौ जैसी मनुबादी नीतियंन के बिरुद्द आट्ट फैकिलटी के सामूँ बैठकैं मईनन अनसन करौ तो उर महिला खों पुरुसन के समान हर अधिकार दिलाबै के लानें जगताईग्यानपीठ परिसर सें लैकैं 'महिला बिरोबरी अधिकार यात्तरा' संसद भबन लौक निकारी ती, जीमें हजारन छात्त-छात्तराएँ सामिल भए ते। सिरकार खों सौंपे गए 'भारतीय महिला बिरोबरी घोसनापत्त' की छै मुख्य माँगें हतीं - "महिलन के लानें लोकसभा-राज्जसभा, बिधानसभा-बिधानपरिसद उर पंचयातन में पचास पिरतीसत जगा आरकछित हौबै। महिलन के लानें हर पाठसाला, महाँपाठसाला उर जगताईग्यानपीठ में पिरबेस के लानें पचास पिरतीसत जगा आरकछित हौबै। महिलन के लानें पिरसासनिक, न्यायिक, कारमिक उर सिक्छा सेबा समेत हर सेबा में पचास पिरतीसत जगा आरकछित हौबै। महिलन खों मनुसिमिरती के अनुसार पुरुसन के बिरोबर सौरा संस्कार करबै कौ कानूनी अधिकार मिलबै। महिलन खों पुरुसन के बिरोबर हर काम करबै उर बिनके बिरोबर बेतन पाबै कौ अधिकार मिलबै। महिलन खों कौनऊँ जात, कौनऊँ धरम बारे अपनी पिसंद के पुरुस खों जीबनसाथी चुनबै कौ अधिकार मिलबै।"
सिरकार नें इन सबरी माँगन खों लैकें आयोग कौ गठन करकें जलदईं सें जलदईं कानून बनाबै कौ मेघना सिंघ कुसबाहा उर ऊके साथियन खों आसुवासन दओ। देस-बिदेस में मेघना की नेतागिरी की पिरसंसा भई। पिरधानमंतरी मोदी जू नें भी अपनी 'मन की बात' में मेघना की चरचा करी - "बुंदेलखंड के किसान की बिटिया, नारी सक्ती की दिव्य मूरती मेघना सिंघ कुसबाहा, आज की साबित्तरीबाई फुले हैं। साबित्तरीबाई फुले ने उनइसबीं सदी के पाँचबे दसक में बिटियंन के लानें देस की पैली कन्या पाठसाला खोलकैं नारी-सिक्छा कौ जग्ग सुरूँ करौ तो। जीमें हम सब आज भी अपनी आहुतियाँ दैकें देस की समरिद्दी के लानें काम कर रए हैंगे। साबित्तरीबाई फुले सें पैलें महिलन की सिक्छा दैबो पाप हतौ। सिक्छा की देवी साबित्तरीबाई फुले उर किसान समाजसुदारक महात्मा जोतीबा फुले के द्वाराँ हिन्दू धरम सुदार के लानें करै गए बदलाओकारी कामन सें आज हम, आप उर अखंड संसार पिरेरना लै रओ। हम सब मिलकैं देस की आदी आबादी, नारी सक्ती के हित में कानून बनाकैं इकइसबीं सदी कौ नओ भारत-ससक्त भारत बना रए हैं।"
बी०ए० की डिगरी पूरी करकैं मेघना अपनी जनमभूम बुंदेलखंड बापस लौट याई उर झाँसी में रैकैं बुंदेलखंड कालेज सें बकालत की पढ़ाई पढ़न लगी। एल०एल०बी० की पैली साल सेंईं मेघना कौ सैपाठी अमरसिंघ यादब के संगे पिरेम-पिरसंग चलौ। अमरसिंघ तेंदौल के सिरकारी ठेकेदार कौ इकलौतो बेटा हैगो। दोईयंन नें दो साल बाद ब्याव रचाबै कौ फैंसला करौ।
दोईयंन नें तै करौ के ब्याव के बाद हम दोई जनें अपने नाँव के संगे एक-दूसरे की जात लगाहैं जैसीं ब्यावता बामुन महिलाएँ लगातई लेकन ब्यावता बामुन पुरुस नईं लगातई।
तुमनें देखौ भी है सोसल मीडिया, फेसबुक उर अखबारन में.... सीमा दुबे तिबाई, पूजा चौबे मिसरा, आराधना सरमा नायक.......। पिछली साल, बा अपने बरूआसागर के दोस्त अखंड नायक की बैन इंजीनियर पल्लबी नायक कौ ब्याव सुदेस तिबाई सें भओ तो। तौ अब अखंड की बैन ब्याव के बाद अपनौं नाँव इंजी० पल्लबी नायक तिबाई लिखतई उर ऊकौ पति ब्याव के बाद भी अपनौं नाँव सुदेस तिबाई, सिरकारी ठेकेदार लिखतई। हम दोईयंन कौ बुंदेलखंड में ऐसौ पैलो ब्यावता जोड़ा हौए किसान-पिछड़न में, जीमें पति-पत्नी अपने नाँव के संगे एक-दूसरे की जात भी लगातई। ब्याव के बाद हम कुवाएँ - बकील अमरसिंघ यादब कुसबाहा उर तुम कुवाओ - बकील मेघना सिंघ कुसबाहा यादब।
दोईयंन नें अपने-अपने घरै ब्याव के सन्बंध में मताई-बाप सें बात करी। दोईयंन के घरबाय मान गए कायकि दोईयंन के घरबाय इकइसबीं सदी की दुनियाँ के संगे चलन चाऊत। बरूआसागर के नगर भबन सें नौ फरबरी खों मेघना उर अमरसिंघ कौ ब्याव तै भओ। सगाई, ओली भराई, पकक्यात जैसीं रस्में हौबै के बाद बड़ी धूमधाम सें नौ फरबरी सन दो हजार बीस खों ब्याव संपन्न भओ। बलदेवपुरा, तैंदोल उर बरूआसागर नगर में लगे बैनरन उर न्यौते में लिखौ तो - “कुसबाहा यादब किसान परबार आपकौ भौत-भौत सुवागत करतई।
।।भले पधारे जू।।
मेघना सिंघ कुसबाहा संग अमरसिंघ यादब।
टींका उर पंगत - नौ फरबरी सन दो हजार बीस
जगा - नगर भबन, बरूआसागर, जिला झाँसी, अखंड बुंदेलखंड.......।”
अबै फिलहाल मेघना एल०एल०बी० करबै के बाद एल०एल०एम० कर रई उर संगेई झाँसी जिला न्यायालय में बकालत भी कर रई। ऊनें बुंदेलखंड में फिर सें छात्तसंघ चुनाओ की बहाली खों लैकैं 'बदलाओकारी बुंदेलखंड छात्तसंघ संघर्स पंचयात' संगठन बनाओ हैगो उर बुंदेलखंड कालेज उर बुंदेलखंड जगताईग्यानपीठ पिरसासन सें लैकैं हाईकोट लौक सबई छात्त संगठनन खों संगे लैकैं आबाज बुलंद कर रई, लेकन हाईकोट बुंदेलखंड में छात्तसंघ चुनाओ पे लगी रोक हटाबै तज्जार नईंयाँ। कोट कौ साफ कैबौ है - "अगर राज्ज सिरकार या केंद सिरकार हमसें अपील करै उर सांतीपूर्न चुनाओ कराबै की जुम्मेबारी लैहै तो हम रोक हटा दैहैं।"
हाईकोट के इतैक कैबै पे सबई छात्तनेतन नें जुरमिलकैं उत्तर पिरदेस सिरकार उर केंद सिरकार खों बुंदेलखंड में छात्तसंघ की बहाली के लानें पत्त लिखे, लखनऊ में पिछले चार मईनाँ सें धरना दै रए लेकन सिरकार चुनाओ बहाली के लानें तज्जार नईं भई। सिरकार कौ कैबौ है - "छात्तसंघ चुनाओं में आए दिनाँ हिंसा कै सैकड़न मामले आउत। छात्तनेतन की निर्मम हत्या की घटनाएँ घटतई, ऐईसें चुनाओं पे रोक लगाई। अगर तुम में सें कौऊ या जगताईग्यानपीठ पिरसासन जुम्मेबारी लैबै के हिंसा उर हत्या की घटनाएँ नईं हौहैं, सांतीपूर्न माहौल में चुनाओ कराए जैहैं तो हम तत्काल पिरभाव सें छात्तसंघ की बहाली कर दैहैं।"
कोट कै रओ, सिरकार अपील करबै उर जुम्मबारी लैबै उर सिरकार कै रई, छात्तनेता उर जगताईग्यानपीठ जुम्मेबारी लैबै के चुनाओं में हिंसा उर हत्या की घटनाएँ नईं हौएँ। जब सिरकारई जुम्मेबारी नईं लै रई हैगी तौ जुम्मेबारी कौ लैहै........? सिरकार खुद नईं चा रई के छात्तसंघ चुनाओ हौं, बुंदेलखंड की सिक्छा बिबस्ता में सुदार आबै उर निकम्मे पिरोफेसरन के आचार-बिचारन में बदलाओ आबै उर जगताईग्यानपीठ के घोटाले उजागर हौबैं। छात्तनेता जगताईग्यानपीठ के घोटाले उजागर करतई, निकम्मे पिरोफेसरन खों लैन पे लाउतई उर छात्त-छात्तरन खों अपने हक के लानें लड़बौ सिखातई उर सक्रिय नागरिक बनबै के लानें समाज खों जागरुक करतई।
मेघना अबै लखनऊ मेंईं हती धरना में साथी छात्तनेतन के संगे। पाँच बजें महिन्द भज्जा के निधन की खबर दैबै के लानें सिद्देसुर माते नें फोन करौ - "रोउत भएँ.......हालौ, मेघू बिटिया। अबै हाल घरै आ जाओ। तुमाए बाबूजी नईं रए.......।"
बाबूजी कै निधन की दुखद खबर सुनकैं मेघू फूट-फूटकैं रोन लगी उर साथी सोमेस पाल सें बोली - "अरे! सोमेस हमें अबै हाल अपनी स्कारपियो सें घरै छौरबै चलौ। हमाए बाबूजी नईं रए अब..... सिद्देसुर कक्का नें फोन करकैं बताई हमें अबै..... इतैक सुनकैं सोमेस की आँखन में भी अँसुवा आ गए उर बौ भी फूट-फूटकैं रोन लगौ। दीपक रजक रूमाल सें दोईयंन के अँसुवा पौंछ देउतई उर सोमेस कौ पानूँ सें मौं धौकैं उए फौरन मेघू खों लैकैं घरै भेज देत।
ग्यारा बजे मेघू घरै पौंच गई उर आतई बाबूजी सें लिपटकैं फूट-फूटकैं रोन लगी - "बाबूजी! हमें छौरकैं काय चले गए इतैक जलदीं। अब हमाओ हौसला कौ बढ़ाए। अम्माँ उर गॉंवबारन कौ ध्यान कौ रक्खे.......।"
दुपरे साढ़े बारा बजे लौक सब नातेदार उर मौंजे भर के सौरानागाँव के पंच, संगी-साथी, दोस्त बगैरा जुर गए। महिन्द कक्का कौ अंतिम संस्कार करबै को समै संजा पाँच बजें रखौ गओ। बिनको अंतिम संस्कार बड़े हारे खेत पे हौनें। जितै बिनकी समाधि भी बनाई जैहै। अब सबाल जौ है के बिनकौ अंतिम संस्कार कौ करहै.......? जैसेंईं पतौ चलौ कै अंतिम संस्कार बिनकी बिटिया करहै तौ मनुबादी बामुनन नें सौरानागाँव के बामुन उर बुला लए। मौंजे भर के सौरानागाँव के पंच तौ पैलई सें जुरै ते इतै कायकि आज बिन सब पंचन के मुखिया जू कौ अंतिम संस्कार हौनें तो.......।
सबरे बामुन ई बात पे अड़े ते कै अंतिम संस्कार बिधान उर रिबाज के अनुसार बिनकै भतीजे कमलेस उर बिमलेस में सें कौऊ भी कर दैबै लेकन मौंडी मेघना नईं कर सकहै। मेघना नें सिद्देसुर कक्का उर बाबूजी के सबरे पंच साथियंन सें साफ कै दई - “चाय कछू भी हौए, बाबूजी कौ अंतिम संस्कार हमईं करहैं उर हमाए संगे हमाई मताई समेत गाँव उर नातेदारी की सारी महिलाएँ, मौंडिएँ भी तपनाँ लगाबै चलहैं। अब रिबाज बदलेगौ। महिलन खों सौरा संस्कार करबै कौ अधिकार मिलकैं रैहै।”
ई गाँव, समाज सें मनुबादी बामुनन की बेड़ियन सें मुक्ती मिलकैं रैहै। अब बदलाओकारी-फुलेबादी समाज बनकैं रैहै। दुनियाँ में किसानबाद आकैं रैहै। बाबूजी के अंतिम संस्कार के संगेई आज हम बिन सबई रीति-रिबाजन, परम्परन उर बुरईं पिरथन कौ अंतिम संस्कार कर दैहैं, जौंन महिलन खों पुरुसन के बिरोबर काम करबै सें रोकतई। महिलन की आजादी पे रोक लगातई। बिनें घर में कैद रखतई। जब देस कौ संबिधान 'भारत बिधान' उर सिरकार महिलन खों पुरुसन की बिरोबरी के सबरे अधिकार दै रई तौ हमें रोकबै बारे जे मनुबादी बामुन हौत कौ हैं........? जे का हमाए मालिक हैं? का जे समाज के ठेकेदार हैं? का हम जिनके गुलाम हैं? जौंन हम जिनके हिसाब सें चलैं.......। जे भी सनातनी हिन्दू हैं उर हम भी सनातनी हिन्दू हैं। तौ फिर जिनकै कामन उर हमाए कामन में इतैक अंतर काय??? समाज पे जिनकी बातन के पिरभाव उर हमाई बातन के
पिरभाव में अंतर काय? जिननें मनुसिमिरती, हिन्दू धरमसास्त्त पढ़े हैंगे ऐईसें जे बिद्वान पंडित कुवात हैंगे तौ हमनें भी बकालत में हिन्दू बिधि के संगे संबिधान 'भारत बिधान' जैसे कानून पढ़े हैंगे ऐईसें हम भी बिद्वान बकील कुवात हैंगे। हमाओ कानून कैऊत हैगो - समाज की जरूरत के हिसाब सें घिसे-पिटे पुराने बिधि-बिधानन, रीति-रिबाजन, परम्परन में सुदार करकैं बदलाओ कर लैंएँ चज्जे। सती पिरथा पे रोक, बिधवा ब्याव की सुरूँआँत हिन्दू धरम सुदार हते तौ अब हम हिन्दू धरम में एक उर जौ सुदार काय नईं कर लेत के बिटिंयाँ उर महिलाएँ भी अपने मताई-बाप कौ अंतिम संस्कार कर सकहैं।
जैसौ जग्ग में महिला-पुरुस, लोग-लुगाई मिलकैं आहुति दैउत हैंगे तौ मताई-बाप के निधन पे बेटा उर बेटी मिलकैं बिनकौ अंतिम संस्कार काय नईं कर सकत, बिनें आगी काय नईं दै सकत। अगर बेटा नईं हैगो तौ सिरफ बेटी खोंईं अंतिम संस्कार करबै कौ रिबाज काय न बनबै? बाबूजी के पंच साथियों! तुम सब जनन कौ का बिचार है मोए धरमसुदार के सुजावन पे?
मेघना बिटिया! हम सब पंच लोग तुमाई हर बात सें पूरी तराँ राजी हैं। आज सें बिटियंन खों भी अपने मताई-बाप कौ अंतिम संस्कार करबै कौ अधिकार हैगो, जे फैंसला हम सौरानागाँव के पंच आज की पंचयात में सुनात हैं। आज तुम अपने बाबूजी कौ अंतिम संस्कार करकैं ई रिबाज की सुरूँआँत करौ कै हमाए इतै बिटिंयाँ भी अंतिम संस्कार करतई.......।
पंच साथियों! एक उर बात..... जे बेई गौरीदास दुबे पंडितजी हैं न, जौंनकौ पिछले मईनाँ अपने भतीजे सें जजमानी की बटाई खों लैकैं घमासान भओ तो। भतीजे सुकदीन सास्त्तरी, ऊके बाप उर भज्जा नें मिलकैं जिनके मूड़ पे मुन्डई मुन्डा मारे ते उर जिनकै बेटा कौ भी मुन्डा-चप्पलन सें दुचलन बना दओ तो। मुहल्लाबारे ई तमासे खों बड़े गौर सें देख रए ते। बीचाखोंची करबै आई पंडिताईन काकी की धुतिया खैंचकैं ऊ ढोर भतीजे नें तमासबीन मुहल्लाबारन के मजाऊँ फैंक दई ती। पतौ, ऊ दिनाँ, मताई बिरोबर काकी दिरोपती कौ चीरहरन रोकबै कौ आऔ तो.......? हमाओ भज्जा समरसिंघ, सिद्देसुर कक्का कौ बेटई आऔ तो। सब भूल गए जे पतनसील पंडित.......। देखौ, आज जे ओई भतीजे खों लैंकैं हमें अपने बाप कौ अंतिम संस्कार करबै सें रोकबै पे तुले हैंगे। जे बड़े आए हमें रिबाज सिकाबै बारे। खुद कौ घर तौ संमंर नईं पा रओ उर समाज की ठेकेदारी करबै चले आए।
सुनी है कै जिनकौ ढोर भतीजौ मथुरा-बिंदाबन सें भागबत सीककैं आऔ हैगो, बड़ौ कथाबाचक बनबौ चा रओ। घंटा! कथाबाचक बनहैगो जे....... चूले में जाए ई की सुनाई कथा, लुअर लग जाए ईमें। अपने कक्का उर ककयाँवते भज्जा खों मुन्डा-पनइयंन सें मारबै के बाद बौ भतीजौ उर ऊकौ बाप बाबूजी समेत सबरै पंचन खों पींठ-पिछाईं गरिया रए ते, बुरौ-भलौ कै रए ते। ऊ दिनाँ ई पंडित गौरीदत्त दुबे नें जब पंचयात जोरी तौ जे सुकदीन सास्त्तरी पंचन सें अकड़कैं बात कर रओ तो उर जे दोई बाप-बेटा पंचन सें कै रए ते - "जे हम भज्जन कौ घरू बिबाद हैगो। तुम औरें का करबै आए इतै? हम तुमाई कौनऊँ बात नईं मानहैं। कक्का नें जिंदगीभर गाँव की जजमानी करी। अब हम पूरी जजमानी करहैं, आज सें सबरै जजमान हमाए। पंचन नें जजमानी की बंटाई करी तौ हर कौऊ के हींसा में आठ-आठ सौ जजमान आए ते। गौरीदास उर सुकदीन खों आदे-आदे जजमानन के इतै जजमानी करबै कौ फैंसला सुनाओ गओ तो लेकन सुकदीन उर ऊकै बाप नें पंचन कौ फैंसला मानबै सें नाईं कर दई ती उर दोई पंचयात सें उठकैं घर में घुस गए ते.......।"
आज मैं सौरानागाँव के पंचन के मुखिया जू किसान महेंद सिंघ कुसबाहा की बिटिया, बदलाओकारी-फुलेबादी बकील मेघना सिंघ कुसबाहा यादब पंचन के सांमूँ जौ फैंसला सुनाउत - "आज सें किसान, पिछड़े बरग के लोग ई बामुन जात बारे पंडितन सें कौनऊ धारमिक काज, अनुस्टांन, संस्कार नईं कराहैंगे। जब जे जात सें बामुन हौकैं हम कुसबाहा-किसानन की तराँ खेती करतई उर पंडिताई कौ काम अपनौं बिसेसाधिकार समजकैं करतई। हम कुसबाहा-किसानन कौ जिनकै मनुबादी करम-बिधान के अनुसार खेती करबौ बिसेसाधिकार हैगो तौ हम इन जैसौ पंडिताई कौ काम काय नईं कर सकत? हम किसान भी हिन्दू हैंगे, हमें भी अपने धरमग्रंथ पढ़बै कौ उतैकई अधिकार हैगो, जितैक इन बामुनन खों। अब सें हम किसान के बेटा-बिटिंयाँ भी दतिया, बमनुवाँ, मथुरा, कासी में संसकिरित महाँपाठसाला में रैकैं आचार्र उर सास्त्तरी की पढ़ाई करकैं पंडिताई सीकहैंगे उर इन बामुनन जैसौ पंडिताई कौ काम करहैंगे। जे बामुन या तौ खेती छौड़ें या फिर हमें भी पंडिताई करन दैबैं..... दोईयंन में सें एक खों चुननें है इन बामुनन खों। अब सें अगर बामुन भी खेती करहैंगे तौ हम किसान भी पंडिताई करहैंगे..... हमें कौऊ नईं रोक सकत, अब समाज में बदलाओ आकैं रैहै.......।"
मेघना कौ बदलाओकारी फैंसला सुनकैं, सिद्देसुर माते बोले - "ठीक है मेघू जिज्जी। तुम हर बात बिलकुल सई कै रईं। जैसौ तुम चाउतई, अब सें ठीक बैसेंई हौए। चार बज गए हैंगे उर पाँच बजें महिन्द भज्जा कौ अंतिम संस्कार हौनें हैगो। आओ अब, बाबूजी कौ अंतिम संस्कार करबै चलतई.......।
उतै उपस्थित सबई जनन नें महिन्द कक्का खों फूलमाला चढ़ाकैं सिरद्धांजली अर्पित करी उर फिर साढ़े चार बजें महिन्द कक्का कौ तपनाँ लगाबै घर सें निकरै। अंगांईं मेघना उर कमलेस उर पिछाईं बिमलेस उर समरसिंघ बाबूजी की ठठरी खों कन्दा दै रए। अंतिमयात्तरा में हजारन लोग-जनीमाँनसें, मौंडी-मौंडा, पंच, नेता, बकील, पत्तकार, अफसर सबई जनें - "राम-राम सत्त है..... सत्त बोलो मुक्ती है....."
कैउत चल रए हैंगे उर मेघना के मम्माँ रमनसिंघ गैल में मखाने, फूल उर पईसा फेंकत चल रए.......।
ठीक पाँच बजें अंतिमयात्तरा बड़े हारे पौंच गई। नद्दी किनारूँ खेत के कौने पे तपनाँ लगाबै की तज्जारी सिद्देसुर माते नें कर लई ती। सबा पाँच बजें बाबूजी खों आगी दैकैं बिटिया मेघना नें बिनकौ अंतिम संस्कार करौ। तपनाँ में सबई जनन नें लकज्जा दैकैं उर तुलसी चढ़ाकैं महिन्द कक्का खों आखिरी बैर पिरनाम करौ।
सकाएँ झाँसी सें छब्बै बारे अखबार 'बुंदेलखंड तकता' नें पैले पन्नाँ पे खबर छापी - "किसान की बिटिया नें बाप के अंतिम संस्कार के संगे करौ मनुबादी महिलाबिरोधी परम्परन उर रीति-रिबाजन कौ अंतिम संस्कार......."




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