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बदलाओकारी विचारधारा / किसानवाद / कुशराजवाद के प्रवर्त्तक - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा / कुशराज / सतेंद सिंघ किसान के साहित्यिक, भाषाई, आंचलिक, क्षेत्रीय, देहाती, शहरी, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, शैक्षिक, धार्मिक, नैतिक, वैज्ञानिक, सिनेमाई, पर्यावरणीय, दार्शनिक, ऐतिहासिक, विमर्शीय (किसान विमर्श, स्त्री विमर्श, आदिवासी विमर्श, पुरुष विमर्श, वेश्या विमर्श, दिव्यांग विमर्श, किन्नर विमर्श, पर्यावरण विमर्श...) और अनुदित लेखन का हिन्दी, कछियाई, बुंदेली और अंग्रेजी भाषा में संकलन...
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बुंदेली के महत्त्व को रेखांकित करता लघुशोध-प्रबंध '21वीं सदी में बुंदेली : एक मूल्यांकन' - डॉ० शिवजी श्रीवास्तव
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कुशराज झाँसी की किसान विमर्श की बदलाओकारी कविताएँ : किसानी कैप्सूल
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कुशराज झाँसी की किसान विमर्श की बदलाओकारी कविताएँ : किसानी कैप्सूल - कुशराज झाँसी
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'21वीं सदी में बुंदेली : एक मूल्यांकन' गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज' का मौलिक शोध, इसे इतिहास ग्रंथ में बदल सकता है शोधार्थी - डॉ० लखनलाल पाल
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बुंदेलखंड़ कॉलेज, झाँसी (बुंदेलखंड़ विश्वविद्यालय, झाँसी) की 'परास्नातक हिन्दी' उपाधि हेतु प्रस्तुत लघु शोध-प्रबंध "21वीं सदी में बुंदेली : एक मूल्यांकन" का 'उपसंहार' - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज' (बुंदेली-बुंदेलखंड अधिकार कार्यकर्त्ता, युवा लेखक, इतिहासकार - सीसीआरटी, संस्कृतमंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्थापक - अखंड बुंदेलखंड महाँपंचयात, झाँसी)
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बुंदेलखंड़ कॉलेज, झाँसी (बुंदेलखंड़ विश्वविद्यालय, झाँसी) की 'परास्नातक हिन्दी' उपाधि हेतु आचार्य सजंय सक्सेना जी के निर्देशन में प्रस्तुत लघु शोध-प्रबंध "21वीं सदी में बुंदेली : एक मूल्यांकन" की प्रस्तावना - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज झाँसी'
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वेश्या विमर्श की कविता : नेकचलनी की जिंदगी जी - सतेंद सिंघ किसान
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किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज झाँसी' की आलोचना पर टिप्पणी...
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26वें जन्मदिन पर युवा लेखक, सामाजिक कार्यकर्त्ता कुशराज के नाम उनके गुरूजी डॉ० रामशंकर भारती का संदेश
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