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बदलाओकारी विचारधारा / किसानवाद / कुशराजवाद के प्रवर्त्तक - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा / कुशराज / सतेंद सिंघ किसान के साहित्यिक, भाषाई, आंचलिक, क्षेत्रीय, देहाती, शहरी, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, शैक्षिक, धार्मिक, नैतिक, वैज्ञानिक, सिनेमाई, पर्यावरणीय, दार्शनिक, ऐतिहासिक, विमर्शीय (किसान विमर्श, स्त्री विमर्श, आदिवासी विमर्श, पुरुष विमर्श, वेश्या विमर्श, दिव्यांग विमर्श, किन्नर विमर्श, पर्यावरण विमर्श...) और अनुदित लेखन का हिन्दी, कछियाई, बुंदेली और अंग्रेजी भाषा में संकलन...
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गुरूजी डॉ० रामशंकर भारती की कविता 'गॉंव की कविता' पर कुशराज की आलोचनात्मक टिप्पणी
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लखनलाल पाल के संस्मरण 'बाढै पुत्र पिता के धरमा' पर कुशराज की आलोचनात्मक टिप्पणी
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जल्द आ रही है कविता की नई किताब 'आखिर कब तक...?' - कुशराज
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छोटे भाई प्रशांत कुशवाहा ने 68वीं प्रादेशिक माध्यमिक विद्यालयीय कबड्डी प्रतियोगिता में जीता कांस्य पदक - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज'
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हमारे जीवन का स्वर्णिम शिक्षक दिवस - किसान गिरजाशंकर कुशवाहा 'कुशराज'
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युवा पीढ़ी को प्रेम के साथ ही शिक्षा के महत्त्व का संदेश देती है कुशराज की कहानी 'घर से फरार जिंदगियाँ' - डॉ० रिंकी रविकांत
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बुंदेली ज्ञान परंपरा का गागर में सागर है कुशराज का लघुशोध '21वीं सदी में बुंदेली : एक मूल्यांकन' - पंडित सुमित दुबे
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